उत्तराखंड के पूर्व मुख्य सचिव के बेटे को ठगी के आरोप में गिरफ्तार, खुद को IPS बताकर लाखों की ठगी का आरोप

देहरादून : उत्तराखंड के पूर्व मुख्य सचिव एस. रामास्वामी के बेटे आर. यशोवर्धन को देहरादून पुलिस ने ठगी के आरोप में गिरफ्तार किया है। आरोपी के खिलाफ एक और मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस ने उसे गुरुवार को न्यायालय में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया।पुलिस के अनुसार, कुर्बड़ी लैब अनुसंधान संस्थान के संस्थापक डॉ. अनुराग अच्युतम राजगुरु की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया। शिकायत में आरोप है कि यशोवर्धन ने खुद को आईपीएस अधिकारी और स्पेशल फोरेंसिक अधिकारी बताकर विश्वास में लिया तथा 4.60 लाख रुपये की ठगी की। इतना ही नहीं, पीड़ित ने आरोपी पर मानसिक उत्पीड़न का आरोप भी लगाया है।जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी के कब्जे से वॉकी-टॉकी, सैन्य वर्दी और विभिन्न टोपियां बरामद की हैं।

पुलिस का कहना है कि आरोपी इन सामानों का इस्तेमाल लोगों पर प्रभाव जमाने और खुद को उच्च पदस्थ अधिकारी बताने के लिए करता था।पुलिस ने बताया कि कुछ दिन पहले ही एक इंटर्न डॉक्टर की शिकायत पर भी यशोवर्धन के खिलाफ करीब 15 लाख रुपये की ठगी का मामला दर्ज किया गया था। दोनों मामलों की जांच जारी है और पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है कि कहीं उसने इसी तरह अन्य लोगों को भी अपना शिकार तो नहीं बनाया।करीब 35 वर्षीय यशोवर्धन देहरादून के गढ़ी कैंट स्थित आईएमए परिसर की ऑफिसर्स रेजिडेंशियल कॉलोनी में रहता था।

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प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि वह खुद को कभी आईपीएस अधिकारी, कभी वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और कभी खुफिया एजेंसियों से जुड़ा बताकर लोगों का भरोसा जीतता था।पुलिस का कहना है कि मामले की गहन जांच की जा रही है और यदि अन्य पीड़ित सामने आते हैं तो उनके बयान भी दर्ज किए जाएंगे।IPS, फोरेंसिक अफसर और खुफिया अधिकारी बनकर बिछाया ठगी का जाल, वर्दी-आईडी और वॉकी-टॉकी से लोगों को करता था गुमराह। पुलिस जांच में सामने आया है कि वह कभी खुद को आईपीएस अधिकारी, कभी स्पेशल फोरेंसिक अधिकारी और कभी खुफिया एजेंसी का वरिष्ठ अधिकारी बताकर लोगों का विश्वास जीतता था।

इसके बाद फर्जी पहचान के दम पर लोगों से लाखों रुपये की ठगी करता था।पुलिस के अनुसार, बचपन से अफसरों के बीच पले-बढ़े यशोवर्धन का सपना खुद अधिकारी बनने का था, लेकिन यूपीएससी में सफलता नहीं मिलने पर उसने कथित तौर पर फर्जी अफसर की भूमिका निभानी शुरू कर दी। अपनी पहचान को असली साबित करने के लिए उसने फर्जी आईडी कार्ड, विजिटिंग कार्ड, सेना जैसी वर्दी, वॉकी-टॉकी और अन्य सरकारी उपकरणों का इस्तेमाल किया। उसकी बातचीत और व्यवहार इतना प्रभावशाली था कि लोग आसानी से उसके झांसे में आ जाते थे।

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महिला वैज्ञानिक को भी बनाया निशानाजांच में सामने आया है कि आरोपी ने एक महिला वैज्ञानिक से संपर्क करते हुए खुद को आईपीएस अधिकारी और नारकोटिक्स विभाग का स्पेशल कमांडर बताया। विश्वास जीतने के लिए उसने फर्जी पहचान पत्र दिखाए और कथित तौर पर टास्क फोर्स में सलाहकार बनाने का झांसा देकर ठगी की कोशिश की। इतना ही नहीं, वह रास्ते में यातायात नियम तोड़ने वालों को रोककर वॉकी-टॉकी पर कार्रवाई का दिखावा भी करता था, ताकि उसकी पहचान पर किसी को संदेह न हो।पहले भी दर्ज हो चुके हैं ठगी के मुकदमेयशोवर्धन के खिलाफ पहले भी लाखों रुपये की ठगी के मामले दर्ज हो चुके हैं। हाल ही में एक इंटर्न डॉक्टर ने भी उसके खिलाफ करीब 15 लाख रुपये की धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया था। वहीं, एक अन्य शिकायत में खुद को आईपीएस और स्पेशल फोरेंसिक अधिकारी बताकर 4.60 लाख रुपये की ठगी का आरोप लगाया गया है।

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वर्दी, वॉकी-टॉकी और अन्य सामान बरामदपुलिस ने आरोपी के कब्जे से वॉकी-टॉकी, सैन्य वर्दी, फर्जी पहचान से जुड़े दस्तावेज और अन्य सामान बरामद किया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि उसने इसी तरीके से और कितने लोगों को अपना शिकार बनाया।पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और यदि अन्य पीड़ित सामने आते हैं तो उनके बयान भी दर्ज किए जाएंगे।

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