राजमिस्त्री के पोते से सहायक आयुक्त तक: पवन की सफलता ने लिखी संघर्ष और संकल्प की नई कहानी

रिपोर्ट : सुनील भारती

नैनीताल : पहाड़ की कठिन राहों से निकलकर जब कोई युवा अपने सपनों को हकीकत में बदलता है, तो उसकी कहानी सिर्फ एक उपलब्धि नहीं, बल्कि हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन जाती है। ऐसी ही प्रेरक कहानी है नैनीताल के पवन कुमार की, जिन्होंने बिना किसी कोचिंग के पहले ही प्रयास में उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (पीसीएस) परीक्षा उत्तीर्ण कर सहायक आयुक्त राज्य कर के पद पर चयन हासिल किया है।अल्मोड़ा जिले के छोटे से गांव मटकन्या से ताल्लुक रखने वाले पवन कुमार ऐसे परिवार से आते हैं, जहां सपने तो बड़े थे, लेकिन संसाधन सीमित।

उनके दादा स्वर्गीय दुर्गा राम राजमिस्त्री थे, जबकि पिता राजेंद्र प्रसाद रोजगार की तलाश में वर्षों पहले नैनीताल आए और होटल में कर्मचारी के रूप में काम शुरू किया। मेहनत और ईमानदारी के दम पर वे प्रबंधक पद तक पहुंचे, लेकिन उनकी सबसे बड़ी ख्वाहिश थी कि उनके बच्चे अधिकारी बनकर परिवार का नाम रोशन करें।पवन ने अपनी शुरुआती शिक्षा गांव के सरकारी विद्यालय से प्राप्त की। आगे की पढ़ाई के लिए उन्हें घर से दूर रहना पड़ा, लेकिन कठिनाइयों ने कभी उनके हौसले कमजोर नहीं किए।

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डीएसबी परिसर में पढ़ाई के दौरान वे एनसीसी के सीनियर अंडर ऑफिसर रहे और लगातार अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहे।सफलता का यह सफर आसान नहीं था। पवन ने सर्विस सेलेक्शन बोर्ड की परीक्षाओं में सात बार असफलता का सामना किया, लेकिन हार मानने के बजाय उन्होंने हर असफलता को सीख में बदला। पढ़ाई के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे रोजाना करीब आठ घंटे नियमित अध्ययन करते थे। सोशल मीडिया से दूरी और पुस्तकों से दोस्ती उनकी सफलता का महत्वपूर्ण आधार बनी।वर्तमान में राजनीति शास्त्र विषय में पीएचडी कर रहे पवन ने वर्ष 2024 में यूजीसी-जेआरएफ नेट परीक्षा भी उत्तीर्ण की थी।

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लेकिन उनका सबसे बड़ा सपना प्रशासनिक सेवा में जाना था, जो अब साकार हो गया है।पीसीएस परीक्षा का परिणाम घोषित होने के बाद जब सूची में अपना नाम देखा तो पवन और उनके पिता की आंखें खुशी से भर आईं। वर्षों का संघर्ष, त्याग और मेहनत आखिरकार रंग ला चुकी थी।पवन की उपलब्धि इसलिए भी विशेष है क्योंकि वे अपने गांव के पहले ऐसे युवा बने हैं जिन्होंने अधिकारी का पद हासिल किया है।

उनकी सफलता यह साबित करती है कि मंजिल तक पहुंचने के लिए महंगे कोचिंग संस्थान नहीं, बल्कि दृढ़ संकल्प, अनुशासन और निरंतर प्रयास की आवश्यकता होती है।आज मटकन्या गांव से लेकर नैनीताल और अल्मोड़ा तक हर कोई पवन की सफलता पर गर्व महसूस कर रहा है। उनकी कहानी पहाड़ के उन हजारों युवाओं के लिए उम्मीद की किरण है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का साहस रखते हैं।

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