वन्यजीव संरक्षण की बारीकियों से रूबरू हुए विद्यार्थीसांपों की पहचान से लेकर बाघों के संरक्षण तक विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव

रिपोर्ट- सुनील भारती

नैनीताल। वन्य प्राणी सप्ताह के चौथे दिन सोमवार को जीबी पंत उच्च स्थलीय प्राणी उद्यान में विशेषज्ञ संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों और वन विभाग से जुड़े प्रतिभागियों को मानव-वन्यजीव संघर्ष, जैव विविधता, वन्यजीव संरक्षण, रेस्क्यू अभियान और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी गई। कार्यक्रम में करीब 150 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।प्राणी उद्यान के निदेशक एवं नैनीताल वन प्रभाग के डीएफओ आकाश गंगवार की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा करते हुए वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता और उनके संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया।पहले सत्र में पश्चिमी वृत्त हल्द्वानी के वरिष्ठ बायोलॉजिस्ट प्रशांत कुमार ने सांपों की विभिन्न प्रजातियों की पहचान और उनके विष के प्रकारों की जानकारी दी। उन्होंने मानव-सर्प संघर्ष के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में भी बताया। वरिष्ठ पशु चिकित्साधिकारी डॉ. हिमांशु पांगती ने वन्यजीव रेस्क्यू अभियानों से जुड़ी जानकारी डॉक्यूमेंट्री के माध्यम से साझा की। सेवानिवृत्त वन क्षेत्राधिकारी मनोज साह ने चिड़ियाघर प्रबंधन, रखरखाव और विभिन्न प्रकार के प्राणी उद्यानों की कार्यप्रणाली समझाई।डीएसबी परिसर के वनस्पति विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. ललित तिवारी ने जैव विविधता और सतत विकास पर विचार रखते हुए पर्यावरणीय बदलाव तथा बढ़ती आपदाओं के कारणों पर चर्चा की। उन्होंने प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का संदेश दिया। सेवानिवृत्त अपर निदेशक पशुपालन विभाग डॉ. योगेश भारद्वाज ने बाघों की पहचान, उनकी प्रजातियों और रेस्क्यू में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों की जानकारी दी।अनुभवों से समझाया संरक्षण का महत्वदूसरे सत्र में पद्मश्री एवं अंतरराष्ट्रीय छायाकार अनूप साह ने उत्तराखंड की पर्वत श्रृंखलाओं तथा यहां पाई जाने वाली वन्यजीव और वनस्पति प्रजातियों के संरक्षण की जानकारी दी। पद्मश्री इतिहासकार डॉ. शेखर पाठक ने वन्यजीवों से जुड़े अपने अनुभव साझा करते हुए विद्यार्थियों को प्रकृति के प्रति जिम्मेदार बनने का संदेश दिया।शिप्रा कल्याण समिति के अध्यक्ष जगदीश नेगी ने प्लास्टिक कचरे और बोतलों के पुन: उपयोग से सौंदर्यीकरण के स्थानीय प्रयासों की जानकारी दी। ओखलकांडा के चंदन नयाल ने जल संरक्षण के लिए स्थानीय लोगों के सहयोग से चाल-खाल और पारंपरिक जल संरचनाएं तैयार करने का अनुभव साझा किया।ओरिएंटल ट्रेल के संस्थापक अमित सांकल्य ने पक्षियों की पहचान, चोंच की बनावट के आधार पर विभिन्न प्रजातियों की पहचान और प्रवासी पक्षियों के अंतरराष्ट्रीय हवाई मार्गों के बारे में जानकारी दी।कार्यक्रम का संचालन बायोलॉजिस्ट अनुज कांडपाल ने किया। वन्य प्राणी सप्ताह के तहत नैनीताल वन प्रभाग के विभिन्न विद्यालयों के 216 विद्यार्थियों को प्राणी उद्यान का निःशुल्क भ्रमण भी कराया गया। समापन पर उप प्रभागीय वनाधिकारी ममता चंद ने विशेषज्ञों और प्रतिभागियों का आभार जताया। कार्यक्रम में उप निदेशक स्वाति समेत वन विभाग और प्राणी उद्यान के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।

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