ई-रिक्शा सेवा को नहीं मिली अनुमति, एक साल बाद वापस भेजने की तैयारी

भीमताल। महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से महिला सहायता समूह की ओर से लाई गई ई-रिक्शा सेवा करीब एक साल बाद भी शुरू नहीं हो सकी। नगर पालिका से संचालन की अनुमति नहीं मिलने के बाद अब महिला सहायता समूह ई-रिक्शा को वापस हल्द्वानी भेजने की तैयारी कर रहा है। समूह ने पालिका प्रशासन पर दोहरी नीति अपनाने का आरोप लगाया है।महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से महिला सहायता समूह की ओर से ई-रिक्शा संचालन की पहल की गई थी। समूह के अनुसार, स्वरोजगार के लिए करीब एक वर्ष पूर्व ई-रिक्शा भीमताल लाया गया, लेकिन नगर पालिका से संचालन की अनुमति नहीं मिल सकी। अनुमति के अभाव में ई-रिक्शा लंबे समय से खड़ा है और अब इसे वापस हल्द्वानी भेजा जा रहा है।महिला सहायता समूह की अध्यक्ष रेखा कुलियाल ने कहा कि स्थानीय महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से यह पहल की गई थी। यदि ई-रिक्शा संचालन को लेकर कोई नियम या आपत्ति थी तो इसकी जानकारी पहले ही दी जानी चाहिए थी। करीब एक साल तक ई-रिक्शा खड़ा रहने के बाद उसे वापस भेजना महिलाओं के लिए निराशाजनक है।वहीं नगर पालिका अध्यक्ष सीमा टम्टा का कहना है कि भीमताल की सड़कें पहले से ही संकरी और व्यस्त हैं। पर्यटन सीजन में वाहनों का दबाव बढ़ने से कई बार जाम की स्थिति बनती है। ऐसे में ई-रिक्शा के संचालन से यातायात व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए बोर्ड स्तर पर निर्णय लिया गया है कि शहर में जाम की स्थिति न बने।ई-रिक्शा सेवा शुरू नहीं हो पाने से अब महिलाओं की स्वरोजगार पहल और भीमताल की यातायात व्यवस्था के बीच संतुलन का मुद्दा सामने आया है।

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