दीपावली पर महिलाओं की बढ़ी कमाई, नाबार्ड के सहयोग से आत्मनिर्भरता की राह पर नैनीताल के स्वयं सहायता समूहऐपण कला, हस्तशिल्प और LED झालरों की बढ़ी मांग, प्रशिक्षण से लेकर बाजार तक मिल रहे अवसर

हल्द्वानी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के आत्मनिर्भर उत्तराखंड के संकल्प को नैनीताल जिले की स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं धरातल पर साकार करने में जुटी हैं। अपने हुनर, पारंपरिक कला और उद्यमशीलता के दम पर महिलाएं स्वरोजगार की नई इबारत लिख रही हैं। राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के सहयोग से संचालित आजीविका एवं उद्यमिता विकास कार्यक्रम महिलाओं को प्रशिक्षण, उत्पाद निर्माण और विपणन के अवसर उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।दीपावली के अवसर पर नाबार्ड समर्थित स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा तैयार पारंपरिक ऐपण कला, हस्तशिल्प, सजावटी सामग्री और LED झालरों की मांग में बढ़ोतरी हुई है। गिरिजा बुटीक से जुड़ी प्रशिक्षित महिलाएं आकर्षक उत्पाद तैयार कर रही हैं। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद महिलाएं स्थानीय बाजार के साथ ही सोशल मीडिया के माध्यम से भी ऑर्डर हासिल कर अपने कारोबार का विस्तार कर रही हैं।वहीं, हल्द्वानी के लामाचौड़ स्थित नाबार्ड समर्थित ग्राम दुकान महिलाओं के उत्पादों के विपणन का प्रमुख केंद्र बनकर उभर रही है। यहां पांच स्वयं सहायता समूहों की करीब 65 महिलाएं विभिन्न आजीविका गतिविधियों से जुड़ी हुई हैं। इस पहल से महिलाओं को अपने उत्पादों के प्रदर्शन और बिक्री के लिए बेहतर मंच मिल रहा है। त्योहारों के दौरान ऐपण और सजावटी उत्पादों की बढ़ती मांग से महिलाओं को अतिरिक्त आय अर्जित करने का अवसर मिल रहा है।स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं का कहना है कि प्रशिक्षण, कौशल विकास और बाजार की सुविधा मिलने से उनकी आय में वृद्धि हुई है। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में भी मदद मिल रही है। पारंपरिक कला और स्थानीय संसाधनों पर आधारित उत्पाद अब उनके लिए स्वरोजगार का प्रभावी माध्यम बन रहे हैं।नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक मुकेश बेलवाल ने बताया कि नाबार्ड का उद्देश्य महिलाओं को केवल प्रशिक्षण तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उन्हें कौशल विकास से लेकर उद्यम स्थापना, ऋण सुविधा और बाजार से जोड़कर स्थायी आय के अवसर उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि ग्राम दुकान और आजीविका एवं उद्यमिता विकास कार्यक्रम (LEDP) जैसी पहलें स्थानीय उत्पादों को पहचान दिलाने, पारंपरिक कला के संरक्षण और ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के आत्मनिर्भर उत्तराखंड के संकल्प को साकार करने में स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के ये प्रयास महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। नाबार्ड के सहयोग से प्रशिक्षण, उत्पाद निर्माण और विपणन से जुड़कर महिलाएं अपनी अलग पहचान बना रही हैं। दीपावली पर ऐपण कला और LED झालरों की बढ़ती मांग इस बात का प्रमाण है कि स्थानीय हुनर को उचित प्रशिक्षण और बाजार उपलब्ध कराया जाए तो वह रोजगार एवं आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार बन सकता है।

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