कलम की आड़ में कथित खेल! देहरादून में पत्रकारिता की साख पर मंडराते सवाल

देहरादून : देहरादून में पत्रकारिता की आड़ में कथित वसूली का खेल? निष्पक्ष जांच की उठी मांगदेहरादून। राजधानी देहरादून में पत्रकारिता की आड़ में कथित तौर पर वसूली और दबाव बनाने की गतिविधियों को लेकर चर्चाएं तेज हैं। आरोप हैं कि कुछ लोग पत्रकारिता की पहचान का कथित रूप से दुरुपयोग कर अधिकारियों और अन्य लोगों पर दबाव बनाने का प्रयास कर रहे हैं, जिससे पत्रकारिता जैसे सम्मानित पेशे की साख पर सवाल खड़े हो रहे हैं।पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना जाता है। इसका मूल उद्देश्य जनता की आवाज बनना, जनहित के मुद्दों को प्रमुखता से उठाना और व्यवस्था से जवाबदेही सुनिश्चित करना है। हालांकि, आरोप है कि कुछ असामाजिक तत्व इसी पेशे की आड़ लेकर अपने निजी हित साधने और कथित तौर पर अवैध कमाई का प्रयास कर रहे हैं।चर्चा है कि कुछ तथाकथित लोग स्वयं को पत्रकार बताकर अधिकारियों पर किसी कार्य को रुकवाने के लिए दबाव बनाने और बाद में उसे शुरू कराने के नाम पर कथित रूप से धन की मांग करने का प्रयास करते हैं। आरोप यह भी हैं कि उनके दबाव या कथित झांसे में नहीं आने वाले अधिकारियों को बदनाम करने अथवा ब्लैकमेल करने की कोशिश की जाती है।इन आरोपों ने एक गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है कि कहीं पत्रकारिता जैसे जिम्मेदार पेशे की आड़ में निजी हित तो नहीं साधे जा रहे हैं। हालांकि, इन सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।पत्रकारिता किसी की निजी कमाई या स्वार्थ साधने का माध्यम नहीं, बल्कि जनता के प्रति जवाबदेही और जनहित से जुड़ा जिम्मेदार पेशा है। कुछ लोगों के कथित कृत्यों के कारण पूरी पत्रकार बिरादरी की छवि पर सवाल उठना दुर्भाग्यपूर्ण है।मामले में मांग की जा रही है कि यदि पत्रकारिता की आड़ में वसूली, धमकी या ब्लैकमेलिंग जैसे आरोपों में किसी की संलिप्तता पाई जाती है तो उसकी निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाई

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