

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में राज्य के विभिन्न क्षेत्रों, विशेषकर दूरस्थ एवं पर्वतीय क्षेत्रों से आए अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति समुदाय के लोगों के साथ संवाद किया। टिहरी, देहरादून, उत्तरकाशी, चकराता, कालसी सहित विभिन्न क्षेत्रों से आए लोगों ने अपने क्षेत्र की विकास संबंधी आवश्यकताओं, समस्याओं और अपेक्षाओं को मुख्यमंत्री के समक्ष रखा। मुख्यमंत्री ने लोगों की समस्याएं गंभीरता से सुनते हुए संबंधित अधिकारियों को उनके शीघ्र समाधान के निर्देश दिए।मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य उत्तराखंड के प्रत्येक वर्ग, प्रत्येक क्षेत्र और समाज के प्रत्येक व्यक्ति को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है। सरकार समेकित एवं समावेशी विकास के मिशन के साथ कार्य कर रही है। समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक विकास योजनाओं का लाभ पहुंचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की वास्तविक सफलता तभी है, जब सरकार और जनता के बीच सीधा और निरंतर संवाद बना रहे। इसी भावना के साथ जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और आम जनता के बीच संवाद को मजबूत किया जा रहा है, ताकि स्थानीय समस्याओं को समझकर उनका समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जा सके।समान अवसर और सामाजिक सशक्तिकरण पर जोरमुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने संविधान के माध्यम से समानता, सामाजिक न्याय और प्रत्येक नागरिक को समान अवसर का मार्ग दिखाया। केंद्र और राज्य सरकार इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए समाज के सभी वर्गों के सशक्तिकरण के लिए कार्य कर रही हैं।उन्होंने कहा कि विकास का लाभ किसी एक वर्ग या क्षेत्र तक सीमित नहीं रहना चाहिए। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति सहित वंचित और कमजोर वर्गों के सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षिक सशक्तिकरण के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। राज्य के बजट में भी दूरस्थ क्षेत्रों के विकास और कमजोर वर्गों के कल्याण के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं।दूरस्थ क्षेत्रों में पहुंचकर समस्याओं को समझामुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले लगभग पांच वर्षों में उन्होंने चकराता, कालसी, जौनसार-बावर, उत्तरकाशी सहित राज्य के विभिन्न पर्वतीय और सीमांत क्षेत्रों का भ्रमण किया है। सरकार का प्रयास देहरादून तक सीमित रहने के बजाय दूरस्थ गांवों और सीमांत क्षेत्रों में पहुंचकर वहां की वास्तविक परिस्थितियों को समझना और स्थानीय लोगों से सीधे संवाद करना है।उन्होंने कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों से प्रत्यक्ष संवाद से क्षेत्रीय आवश्यकताओं के अनुरूप योजनाओं और विकास कार्यों को आगे बढ़ाने में मदद मिलती है।आंबेडकर से जुड़े स्थलों को पंचतीर्थ के रूप में विकसित करने की पहलमुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के जीवन और योगदान से जुड़े महत्वपूर्ण स्थलों को पंचतीर्थ के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। इसका उद्देश्य नई पीढ़ी को बाबा साहेब के जीवन, संघर्ष, विचारों और संविधान निर्माण में उनके योगदान से परिचित कराना है।उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में भी जनजातीय समाज की समृद्ध परंपराओं, संस्कृति, लोककला, लोकगीत और हस्तशिल्प को व्यापक मंच प्रदान किया जा रहा है। आदि गौरव महोत्सव जैसे आयोजनों के माध्यम से जनजातीय संस्कृति और विरासत को सम्मान देने का कार्य किया जा रहा है।जनजातीय समुदाय के कल्याण के लिए कई योजनाएंमुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा अनुसूचित जनजाति समुदाय के शैक्षिक, सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय, छात्रवृत्ति योजनाएं, प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम-जनमन) और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान जैसी योजनाएं संचालित की जा रही हैं।जनजातीय क्षेत्रों में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, आवास, विद्युत, रोजगार और आजीविका के अवसरों को मजबूत करने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। राज्य सरकार द्वारा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति समुदाय के विद्यार्थियों, युवाओं, महिलाओं और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए विभिन्न कल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं।महिलाओं और पारंपरिक शिल्पकारों को मिल रहा बाजारमुख्यमंत्री ने स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं द्वारा तैयार किए जा रहे स्थानीय उत्पादों, हस्तशिल्प और पारंपरिक शिल्प का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तराखंड के उत्पादों की देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी मांग बढ़ रही है।उन्होंने कहा कि महिला स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए विभिन्न स्तरों पर सहयोग दिया जा रहा है। बिना ब्याज ऋण जैसी सुविधाओं से महिलाओं को स्वरोजगार और उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। पारंपरिक शिल्पकारों को बाजार, आधुनिक डिजाइन, प्रशिक्षण और बेहतर विपणन से जोड़कर उनकी आय बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं।सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाने पर जोरमुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, आयुष्मान भारत, उज्ज्वला योजना, जल जीवन मिशन, स्वच्छ भारत मिशन, स्वरोजगार और कौशल विकास सहित केंद्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ पात्र परिवारों तक पहुंचाया जा रहा है।उन्होंने कहा कि होमस्टे जैसी योजनाओं से पर्वतीय क्षेत्रों में रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं। सरकार का प्रयास है कि दूरस्थ क्षेत्रों के लोग अपनी स्थानीय संस्कृति, प्राकृतिक संसाधनों, हस्तशिल्प और पारंपरिक ज्ञान को आजीविका का माध्यम बनाकर आत्मनिर्भर बनें।लोगों ने मुख्यमंत्री के समक्ष रखीं क्षेत्रीय समस्याएंकार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से आए अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति समुदाय के लोगों ने सड़क, शिक्षा, रोजगार, पेयजल, आजीविका, आधारभूत सुविधाओं और स्थानीय विकास से जुड़ी समस्याएं मुख्यमंत्री के समक्ष रखीं। मुख्यमंत्री ने सभी की समस्याओं को संवेदनशीलता से सुनते हुए संबंधित अधिकारियों को प्राथमिकता के आधार पर समाधान के निर्देश दिए।मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि कोई भी व्यक्ति विकास की दौड़ में पीछे न रहे और दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को भी समान अवसर मिलें। जनभागीदारी और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से ही उत्तराखंड को सशक्त, समावेशी और विकसित राज्य बनाने का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।कार्यक्रम में विधायक सरिता आर्या, विधायक दुर्गेश्वर लाल, सचिव विनय शंकर पांडे, आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप सहित अन्य अधिकारी तथा राज्य के विभिन्न दूरस्थ क्षेत्रों से आए अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति समुदाय के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।



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