उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय और रविन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के बीच एमओयू, शिक्षा व शोध सहयोग को मिलेगा नया आयाम

हल्द्वानी : उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय, हल्द्वानी एवं रविन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय (आरएनटीयू), भोपाल के बीच शिक्षा, शोध एवं नवाचार के क्षेत्र में सहयोग को मजबूत बनाने के उद्देश्य से शनिवार को एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता रविन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रो. संतोष चौबे तथा दोनों विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ।उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) नवीन चन्द्र लोहनी तथा रविन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) रवि प्रकाश दुबे की उपस्थिति में दोनों संस्थानों के अधिकृत प्रतिनिधियों ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर आरएनटीयू की कुलसचिव डॉ. संगीता जौहरी भी मौजूद रहीं।कुलपति प्रो. (डॉ.) नवीन चन्द्र लोहनी ने कहा कि यह समझौता दोनों विश्वविद्यालयों के बीच ज्ञान, अनुभव और संसाधनों के आदान-प्रदान का प्रभावी माध्यम बनेगा। उन्होंने कहा कि बदलते शैक्षणिक परिवेश में संस्थानों के बीच सहयोग समय की आवश्यकता है और यह पहल विद्यार्थियों, शोधार्थियों तथा शिक्षकों के लिए नए अवसरों के द्वार खोलेगी।एमओयू के तहत दोनों विश्वविद्यालय संयुक्त शोध परियोजनाओं, छात्र एवं संकाय आदान-प्रदान, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों, कार्यशालाओं, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, पाठ्यक्रम विकास तथा अन्य शैक्षणिक गतिविधियों में सहयोग करेंगे। साथ ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण, नवाचार आधारित और रोजगारोन्मुखी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए संयुक्त प्रयास किए जाएंगे।रविन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) रवि प्रकाश दुबे ने कहा कि यह साझेदारी दोनों संस्थानों की शैक्षणिक एवं अनुसंधान क्षमता को और अधिक सशक्त बनाएगी। उन्होंने विश्वास जताया कि यह सहयोग विद्यार्थियों के समग्र विकास, नवाचार को प्रोत्साहन तथा उत्कृष्ट अकादमिक वातावरण के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।कार्यक्रम के दौरान उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय की ओर से रविन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रो. संतोष चौबे को विश्वविद्यालय का स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। प्रो. संतोष चौबे ने इस शैक्षणिक सहयोग का स्वागत करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि यह समझौता ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में दीर्घकालिक एवं परिणामोन्मुखी साझेदारी का मजबूत आधार सिद्ध होगा।

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