पॉलिटेक्निक की पढ़ाई के साथ स्वरोजगार की राह, बगड़ पाली के गौरव कुमार बने युवाओं के लिए प्रेरणा

रिपोर्ट : कान्ता पाल

नैनीताल : नैनीताल जिले के बगड़ पाली गांव के युवा गौरव कुमार अपनी मेहनत और रचनात्मक सोच से आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रहे हैं। पॉलिटेक्निक की पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने स्वरोजगार का ऐसा रास्ता चुना है, जो न केवल उनकी आय का साधन बन रहा है बल्कि अन्य युवाओं के लिए भी प्रेरणा बनता जा रहा है।गौरव पिछले दो वर्षों से ऊन और क्रोशिया (कुरुसिया) के धागों से आकर्षक बैग, गुलाब के फूल, की-चेन, वॉल हैंगिंग और अन्य सजावटी सामान तैयार कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि कोरोना काल के दौरान घर पर खाली समय में यूट्यूब के माध्यम से क्रोशिया कला सीखनी शुरू की थी। धीरे-धीरे यह शौक जुनून में बदल गया और उन्होंने इसे स्वरोजगार का माध्यम बनाने का निर्णय लिया।वर्तमान में गौरव पॉलिटेक्निक में डिप्लोमा की पढ़ाई कर रहे हैं। पढ़ाई के साथ वे प्रतिदिन तीन से चार घंटे अपने इस हुनर को देते हैं। शुरुआत में उन्होंने दोस्तों और रिश्तेदारों के लिए छोटे-छोटे उपहार बनाए। उनके काम की सराहना होने लगी तो ऑर्डर मिलने शुरू हो गए। आज वे रंग-बिरंगे बैग, उपहार स्वरूप दिए जाने वाले गुलाब के फूल, की-चेन और घर की सजावट के लिए वॉल हैंगिंग तैयार कर रहे हैं।गौरव बताते हैं कि एक बैग तैयार करने में दो से तीन दिन का समय लगता है और इसकी कीमत 300 से 800 रुपये तक होती है। वहीं गुलाब के फूल और की-चेन 50 से 150 रुपये तक में तैयार किए जाते हैं। सर्दियों के मौसम में ऊनी उत्पादों की मांग और अधिक बढ़ जाती है। सोशल मीडिया के माध्यम से उन्हें नैनीताल, हल्द्वानी और दिल्ली सहित कई स्थानों से ऑर्डर प्राप्त हो रहे हैं।गौरव का सपना है कि पढ़ाई पूरी करने के बाद वह अपना एक स्टार्टअप शुरू करें और गांव की महिलाओं को भी इस कार्य से जोड़ें। उनका मानना है कि यदि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे तो पलायन पर भी रोक लगेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। उनकी यह पहल आत्मनिर्भर भारत की भावना को साकार करने की दिशा में एक प्रेरणादायी उदाहरण बन रही है।

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