कुंडली में चंद्रमा है कमजोर या फिर है चंद्र दोष तो पौष पूर्णिमा के दिन कर लें ये उपाय, बदल जाएगी किस्मत

संजय पाठक, हल्द्वानी :आदि सनातन देवी देवता हिंदू धर्म में पौष मास की पूर्णिमा का विशेष महत्व है। पौष माह भगवान सूर्य को समर्पित होता है। 25 जनवरी 2024 दिन गुरुवार को पूर्णिमा का उपवास रखा जाएगा। ज्योतिषाचार्य डॉ. मंजू जोशी के अनुसार, पौष पूर्णिमा पर सर्वार्थ सिद्धि योग तथा अमृत सिद्धि जैसे विशेष योग होने से उपवास का महत्व और भी विशेष होगा।डॉ. मंजू जोशी बनाती हैं कि पौष मास में सूर्य देव की पूजा,आराधना, उपासना से मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसलिए पौष मास की पूर्णिमा के दिन पवित्र नदियों में स्नान का विशेष महत्व माना गया है और सूर्यदेव की विशेष पूजा अर्चना से विशेष लाभ प्राप्त होते हैं। पूर्णिमा तिथि पर चंद्र देव की पूजा का विधान है अतः सूर्य और चंद्रमा का अद्भुत संगम पौष पूर्णिमा को और भी विशेष बनाता है। सूर्य और चंद्रमा दोनों के पूजन से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। राजकीय सेवाओं हेतु प्रयासरत जातकों को विशेष लाभ प्राप्त होता है एवं जीवन में आने वाली सभी प्रकार की बाधाएं दूर होती हैं।पूर्णिमा का उपवास उन जातकों के लिए विशेष फलदाई होता है जिनकी जन्म कुंडली में चंद्रमा कमजोर स्थिति में हो या चंद्र दोष हो चंद्रमा क्षीण हो, चंद्रमा नीचस्थ हो उन सभी जातकों को पूर्णिमा का उपवास मानसिक शांति प्रदान करता है।::शुभ मुहूर्त::पूर्णिमा तिथि प्रारंभ 23 जनवरी 2024 रात्रि 9:52 मिनट से 25 जनवरी 2024 रात्रि 11:26 पर समाप्त।चंद्रोदय का समय सायंकाल 5:30 बजे होगा।::पूजन विधि::ज्योतिषाचार्य डॉ. मंजू जोशी बताती हैं कि प्रातः काल नित्य कर्म से निवृत्त होकर संपूर्ण घर और मंदिर को स्वच्छ करें। किसी पवित्र नदी में स्नान करें या घर पर ही गंगाजल डालकर स्नान कर सकते हैं। तत्पश्चात व्रत का संकल्प लें। सूर्योदय होने पर सूर्य देव को तांबे के बर्तन से जल अर्पित करें। मंदिर में अखंड ज्योत प्रज्वलित करें। भगवान विष्णु, देवी लक्ष्मी को गंगाजल से स्नान कराएं व आसन प्रदान करें। भगवान को अक्षत, रोली, कुमकुम, धूप, दीप, पान सुपारी, पंचमेवा, पंच मिठाई, पंच फल अर्पित करें। सत्यनारायण की कथा पढ़ें। घी का दीपक जलाकर आरती करें। संध्या काल में चंद्रोदय होने के बाद चंद्रमा को चांदी के बर्तन या स्टील के बर्तन से जल अर्पित करें पूर्ण श्रद्धा से पूजा अर्चना करें। घी का दीपक प्रज्वलित कर आरती करें। खीर का भोग लगाएं। जरूरतमंदों को सफेद वस्तुओं का दान करें। सफेद वस्तुओं में चावल, चीनी, दही, दूध, घी, चांदी, मोती आदि वस्तुओं का दान कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त पौष पूर्णिमा पर गुड़ व तिल का दान भी कर सकते हैं।

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